पानी चाहता है
कि सहरा ज़िन्दगानी चाहता है,
लगी है प्यास पानी चाहता है,,
बिछड़ने की निशानी चाहता है,
मुझे मेरी.... जुबानी चाहता है,,
बुझाई प्यास साग़र ने न साकी,
सुराई .......आसमानी चाहता है,,
जहाँ मे बाँट कर उलफ़त सभी को,
फ़क़त नफ़रत मिटानी चाहता है,,
जिसे कहते हो दोज़ख़ का परिंदा,
मुहब्बत वो रूहानी चाहता है,,
गोपाल गुप्ता" गोपाल"
Mahendra Bhatt
29-Jun-2023 09:18 PM
👌👌
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Suryansh
28-Jun-2023 05:07 PM
बहुत ही सुंदर और बेहतरीन अभिव्यक्ति
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Gunjan Kamal
24-Jun-2023 11:41 PM
👏👌
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