Gopal Gupta

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पानी चाहता है

कि सहरा ज़िन्दगानी चाहता है,
लगी है प्यास   पानी चाहता है,,

बिछड़ने की निशानी चाहता है,
मुझे मेरी.... जुबानी चाहता है,,

बुझाई प्यास  साग़र ने न साकी,
सुराई .......आसमानी चाहता है,,

जहाँ मे बाँट कर उलफ़त सभी को,
फ़क़त नफ़रत मिटानी चाहता है,,

जिसे कहते हो दोज़ख़ का  परिंदा,
मुहब्बत वो रूहानी चाहता है,,

   
     गोपाल गुप्ता" गोपाल"

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4 Comments

Mahendra Bhatt

29-Jun-2023 09:18 PM

👌👌

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Suryansh

28-Jun-2023 05:07 PM

बहुत ही सुंदर और बेहतरीन अभिव्यक्ति

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Gunjan Kamal

24-Jun-2023 11:41 PM

👏👌

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